अयोध्या मामला: हल निकालने में नाकाम रहा मध्यस्थता पैनल, छह अगस्त से रोज होगी सुनवाई

 


नई दिल्ली। नौ साल से अयोध्या में अपनी जन्मभूमि पर मालिकाना हक के मुकदमे की सुनवाई का इंतजार कर रहे  अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद को मध्यस्थता के जरिये सुलझाने की कोशिशें नाकाम होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट छह अगस्त से मामले पर रोजाना सुनवाई करेगा।मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ कर रही है। शुक्रवार को संविधान पीठ ने मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट देखने के बाद उपरोक्त आदेश दिए।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। जिसमें एक हिस्सा भगवान रामलला विराजमान, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को देने का आदेश था। इस फैसले को भगवान रामलला सहित हिंदू मुस्लिम सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में ये अपीलें 2010 से लंबित हैं और कोर्ट के आदेश से फिलहाल अयोध्या में यथास्थिति कायम है।सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को मध्यस्थता पैनल से कहा था कि वह 31 जुलाई तक हुई मध्यस्थता की प्रगति रिपोर्ट दे। पैनल ने गुरुवार को सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी थी। शुक्रवार को पीठ ने कहा कि कोर्ट को मध्यस्थता पैनल के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश एफएमआइ कलीफुल्ला की रिपोर्ट प्राप्त हुई और उन्होंने रिपोर्ट देखी है। मध्यस्थता प्रक्रिया में विवाद का हल नहीं निकला इसलिए कोर्ट अब मुकदमे की लंबित अपीलों पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने कहा कि मामले पर छह अगस्त से रोजाना सुनवाई शुरू होगी और तब तक चलेगी जब तक बहस पूरी न हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सुनवाई की शुरुआत मूल वाद संख्या तीन और पांच से होगी। मूल वाद संख्या तीन निर्मोही अखाड़ा का मुकदमा है और मूल वाद संख्या पांच भगवान रामलला विराजमान का मुकदमा है। कोर्ट ने मामले में बहस करने वाले वकीलों और पक्षकारों से आग्रह किया है कि जिन साक्ष्यों और दलीलों यानी केस लॉ आदि को वे अदालत में पेश करने वाले हैं उसके बारे में पहले से बता दें ताकि कोर्ट स्टाफ उसे पेश करने के लिए तैयार रखे।मुस्लिम पक्ष जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष असद रसीदी की ओर से पेश वकील राजीव धवन ने पहले मूल वाद तीन और पांच की अपीलों को सुनने का विरोध करते हुए कहा कि पहले मूलवाद संख्या चार की अपील पर सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मूल वाद संख्या चार (सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की अपील) को ही ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट ने मुख्य मुकदमा माना था। राजीव धवन ने कहा कि अपीलों पर सुनवाई शुरू करने से पहले लंबित विभिन्न अर्जियों और रिट याचिकाओं का निपटारा होना चाहिए क्योंकि कोर्ट ने शुरुआत में कहा था कि इस मामले में कोई हस्तक्षेप अर्जी स्वीकार नहीं की जाएगी। धवन ने भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की रिट याचिका का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट ने कहा था कि यह याचिका मुख्य मामले के साथ नहीं सुनी जाएगी, लेकिन उसे अभी लंबित रखा हुआ है। मालूम हो कि स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर रामलला की पूजा-अर्चना के मौलिक अधिकार की मांग की है।