मध्‍यप्रदेश में गहरा सकता है बिजली संकट सरकारी बिजली का उत्पादन घटा, नौ यूनिटें बंद

बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार उन कंपनियों से ज्यादा बिजली ले रही है, जिनसे सरकार ने बिजली खरीदी का अनुबंध कर रखा है।



भोपाल। मध्य प्रदेश के बिजली उत्पादन संयंत्रों की कई यूनिट बंद होने से बिजली का उत्पादन कम हो गया है। प्रदेश के संयंत्रों की नौ इकाईयां बंद हैं, जिसके कारण 5400 मेगावॉट क्षमता की जगह मात्र 1510 मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है।जबकि जल बिजली परियोजना से 1500 मेगावॉट बिजली उत्पादित की जा रही है। हालांकि इन दिनों प्रदेश में साढ़े सात हजार मेगावॉट बिजली की मांग के कारण बिजली आपूर्ति पर कोई फर्क नहीं पड़ा है, क्योंकि बिजली की इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार निजी कंपनियों से ज्यादा से ज्यादा बिजली खरीद रही है।प्रदेश में बारिश की शुरुआत होते ही बिजली संयंत्रों की कई यूनिट बंद हो गई हैं, जिस कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हो गया है। संजय गांधी थर्मल पॉवर संयंत्र बिरसिंहपुर में तीन इकाईयां बंद पड़ी हैं। यहां की दो इकाईयां चालू हैं, जिनमें 290 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि क्षमता 1340 मेगावॉट की है।खंडवा के सिंगाजी संयंत्र की दो यूनिट बंद हैं, दो चल रही हैं। यह संयंत्र 2520 मेगावॉट क्षमता का है, लेकिन उत्पादन 680 मेगावॉट हो रहा है। अमरकंटक में 210 मेगावॉट की एक यूनिट बंद है एक चल रही है। हाईडल प्रोजेक्ट में 1500 मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है। सारणी संयंत्र में 330 मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है।बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार उन कंपनियों से ज्यादा बिजली ले रही है, जिनसे सरकार ने बिजली खरीदी का अनुबंध कर रखा है। सरकार ने 20 हजार मेगावॉट बिजली खरीदी के अनुबंध कर रखे हैं, जिन्हें फिक्स्ड चार्ज देना ही होता है।


 


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