जिले में दिनोंदिन घट रही रबी फसल

दिनोंदिन घट रहा रबी फसल का रकबा ,खेती योग्य १.८५ लाख हेक्टेयर बाद भी मात्र ६२ हजार हेक्टेयर पर रबी की बुवाई



अनूपपुर,। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और सिंचाई के लिए बनाई गई जलाशयों की व्यवस्थाओं में खेतों तक पानी के नहंी पहुंच पाने के कारण अब जिले में रबी फसल का रकबा दिनोंदिन घटता जा रहा है। जिसके कारण किसान खरीफ की तुलना में रबी की फसल लगाकर आर्थिक खतरा नहीं उठाना चाहते। मानसून की बौछार के बाद रबी की सीजन में बारिश की कम मात्रा गिरने तथा खेतों तक जलाशयों के नहरों की पहुंच नहीं होने के कारण नवम्बर से मार्च माह के बीच खेतों की नमी सूख जाती है। जिसके कारण अनूपपुर जिले में रबी की कम मात्रा में बुवाई हो पाती है। कृषि विभाग की जानकारी के अनुसार संभाग की लगभग ७३ प्रतिशत मिट्टी हल्की एवं रेतीली है। मृदा ढलान अधिक होने के कारण मिट्टी कटाव अपेक्षाकृत अधिक है। मिट्टी की जलधारण क्षमता कम होने के कारण उत्पादकता का स्तर कम हो जाता है। जिले में लगभग १ लाख १० हजार ८११ किसान पंजीकृत है, इसके अलावा बिना पंजीयन अन्य छोटे किसान भी शामिल हैं। लेकिन अनूपपुर जिले में खेती योग्य लगभग १ लाख ८५ हजार २३६ हेक्टेयर भूमि  होने के बाद भी इनमें खरीफ की खेती लगभग १ लाख ६९ हजार ६८० हेक्टेयर पर होती है। वहीं रबी की फसल मात्र ६२ हजार ८०० हेक्टेयर भूमि पर ही संभव हो पाती है। उपसंचालक कृषि विभाग का कहना है कि जिले में उपलब्ध जलाशयों का समुचित उपयोग करते हुए स्थानीय स्तर पर ही सिंचाई व्यवस्थाओं के माध्यम से रबी की खेती करना शुरू करें तो यह रकबा अधिक बढ़ सकता है। लेकिन सिंचाई की समुचित सुविधा के अभाव में भी किसान रबी की फसल से दूरी बना लेते हैं। पिछले तीन-चार वर्षो के आंकड़ों को देखा जाए तो निर्धारित लक्ष्य से अधिक उत्पादन का लक्ष्य रबी में सामने नहीं आया है। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष २०१६-१७ में रबी की अनुमानित रकबा ७० हजार हेक्टेयर निर्धारित की गई थी। लेकिन बारिश के कारण वास्तविक पूर्ति ७२ हजार के आसपास पहुंच गई। इसके बाद वर्ष २०१७-१८ में लक्ष्य ७० हजार निर्धारित हुआ और पूर्ति ६३ हजार हेक्टेयर ही हो सकी। वर्ष २०१८-१९ में निर्धारित लक्ष्य ७४ हजार हेक्टेयर रखा गया और पूर्ति मात्र ६० हजार हेक्टेयर हो सकी। वहीं वर्ष २०१९-२० में लक्ष्य को कम करते हुए मात्र ६३ हजार हेक्टेयर रखा गया, जिसमें अब फसल कटने के दौरान सर्वेक्षण में लक्ष्य पूर्ति स्पष्ट हो पाएगी। विदित हो कि जिल के चारो विकासखंड में कुल ५२ जलाशय हैं। इनमें अधिकांश जलाशयों से निकलने वाली नहरों का पक्की निर्माण नहीं हुआ है, कुछ के नहर क्षतिग्रस्त हैं तो कुछ जलाशयों में पानी कम होने के कारण उनका पानी खेतों तक पहुंच ही नहीं पा रहा है। 


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