मौत को दावत दे रहे, बिना डिग्री, डिप्लोमा और अनुभव से बने झोलाछाप डॉक्टर:ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों के अभाव

३० हजार की आबादी उपचार के लिए ८ किमी दूर जाने को विवश ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों के अभाव में झोलाछाप डॉक्टरों काट रहे चांदी 



कोतमा,अनूपपुर । केन्द्र व राज्य शासन द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में करोड़ो रुपए खर्च कर अनेक स्वास्थ्य योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। जिससे ग्र्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सके। लेकिन जिला अंतर्गत नपा पसान में स्वास्थ्य सेवा की व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। जिसके कारण स्थानीय ग्रामीण, मरीजों व परिजनों को उपचार के लिए नपा पसान से लगभग ८ किलोमीटर दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोतमा जाना पड़ता है। इसमें भी अधिकांश गरीबों को समय पर वाहनों की सुविधा नहीं मिल पाती है और स्वास्थ्य केन्द्र के अभाव में क्षेत्र के मरीज स्थानीय झोला छाप डॉक्टर के पास इलाज कराने विवश है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का फायदा उठा कई अप्रशिक्षित झोलाछाप डॉक्टरों का जमावड़ा लग गया है। लेकिन क्षेत्र के स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के जिम्मेदार द्वारा आजतक इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य केन्द्र नहीं खोला गया है। परिणामस्वरूप केवल पसान नपा अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में १५ से २० फर्जी दवाखाना अलग-अलग नामों से गली कूची में संचालित हो रहा है। जहां इलाज के नाम पर सस्ते दवाओं को महंगे दामों पर ग्रामीणों से वसूल रहे हैं। 
अप्रशिक्षित झोलाछाप कर रहे उपचार
क्षेत्र में जितने भी झोला छाप डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं उनके पास किसी प्रकार का कोई प्रमाण पत्र या किसी संस्था से प्रैक्टिस सर्टिफिकेट प्राप्त नही है। यह अधिकांश हैम्योपैथ के डॉक्टर हैं। लेकिन इनके क्लीनिक के बोर्डो पर क्लीनिक के नाम के साथ एलोपैथ एमबीबीएस जैसे डिग्री का नाम भी लिखा होता है। वहीं क्लीनिक की आड़ में एलोपैथी दवाओं का भी धड़ल्ले से विक्री करते हैं। 
दवा दुकानों से भी मिलीभगत
स्वास्थ्य केन्द्र की अनुपलब्धा होने के कारण क्षेत्र में अनेक मेडिकल फर्मासिस्ट दुकानें धड़ल्ले से चल रही है। जिनमें से अधिकांश फर्मासिस्ट दुकानें नियमों का पालन करती है शेष ८ से १० दुकानों के स्टाफों को लिखना पढऩा भी ढंग से नहीं आता है। इन दुकानदारों का झोला छाप डॉक्टरों से भी सांठगांठ होता है जो मरीजों को दवा अपनी सुविधा के अनुरूप लिखाने के लिए प्रेरित करता है। वहीं डॉक्टरों को भगवान का दर्जा देने वाले लोग उनके आदेशों का बखुबी से पालन करते हैं।