जेपी नड्डा निर्विरोध चुने गए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले जेपी नड्डा का राजनीतिक सफर 1975 के जेपी आंदोलन से हुआ था। इसके बाद 1977 में वह बिहार में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्र संघ चुनाव जीतकर सचिव बने थे। 1993 में पहली बार विधायक बने थे।



मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में शाह के गृहमंत्री बनने के बाद भाजपा ने उनका उत्तराधिकारी चुनने की कवायद शुरू कर दी थी क्योंकि पार्टी में ‘एक व्यक्ति एक पद’ की परंपरा रही है.नड्डा को गत वर्ष जुलाई में कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. नड्डा 2019 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा के चुनाव अभियान के प्रभारी थे जहां पार्टी को सपा और बसपा के महागठबंधन से कड़ी चुनौती थी.भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटों में से 62 पर जीत दर्ज की. आम चुनावों में भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राज्य संभालने के अलावा नड्डा मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री थे. वह संसदीय बोर्ड के एक सदस्य रहे हैं जो कि पार्टी का निर्णय लेने वाला शीर्ष निकाय है.अध्यक्ष चुने जाने के बाद जगत प्रकाश नड्डा  ने पार्टी मुख्यालय में सैकड़ों कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. नड्डा ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देने के लिए संगठन का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि जो प्रेम, विश्वास, सहयोग आपने मुझ पर किया है, उसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं. विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के काम को संभालने और उसे आगे ले जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी संगठन ने जो मुझ पर विश्वास किया है उसके लिए मैं सभी को धन्यवाद देता हूं.भाजपा के अध्यक्ष ने कहा कि देश में सबसे मजबूत पार्टी, राज्यों में शासन करने वाली पार्टी, सबसे बड़ी सांसदों और विधायकों सदस्य संख्या हमारी है. हम रुकने वाले नहीं हैं, अभी भी कुछ प्रदेश बच गए हैं, वहां भी हमारा निशाना पूरा है. आने वाले समय में पूरे भारत में भाजपा के कमल को हम पहुंचाएंगे.


 


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