आपदा के समय में अंतरिम मंत्रि मंडल का गठन होना जरूरी


चैतन्य मिश्रा :-


अनूपपुर /मध्यप्रदेश में  15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार दो सप्ताह चले सियासी घटना क्रम के बाद  अल्पमत में आने  से 15 महीनों में ही सत्ता गवा दी । जिसके बाद एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के  शिवराज सिंह चौहान ने  प्रदेश के सत्ता की कमान अपने हाथो में ले ली  लेकिन इस बार शिवराज सिंह चौहान ने ऐसे दौर में सत्ता संभाली है जब कोरोना जैसी महामारी से देश ही नहीं पूरा विश्व जूझ रहा है इस कोरोना वायरस संकट से मध्यप्रदेश भी अछूता नहीं हैजिसके कारन प्रदेश के सभी शहरों में पूर्णतः लॉक डाउन  घोषित किया गया है इसके वावजूद हर दिन को कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है जिसको लेकर शिवराज सरकार द्वारा लगातार अहतियात बरती जा रही है। जहां पूरे प्रदेश में लॉक डाउन के दौरान कर्फ्यू की घोषणा की गई है तो वही जिला प्रशासन और पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए है। जिला स्तर पर कोरोना संक्रमण से पीड़ित व्यक्तियों के लिए एक अस्पताल चिंहित किया गया है। यही नहीं आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार ने कई अहम कदम उठाए है।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ पूरा प्रशासन दिन-रात लगा हुआ है कि किसी भी तरह प्रदेश को कोरोना संक्रमित होने से बचाया जा सके। प्रदेश में अब तक कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 274 हो गई है। जिसमें  अब तक 17 मरीजों की मौत हो चुकी है। भोपाल में आज कोरोना संक्रमण के 12 नए मामले के साथ  मरीजों  की कुल संख्या  ७५ हो गयी है जिसमें 34 संक्रमित अकेले स्वास्थ्य विभाग के हैं। आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।  इन सब के बीच शिवराज सिंह चौहान पूरी मुस्तैदी से डटे हुए है ,और कोरोना के खिलाफ युद्ध स्तर पर जंग लड़ रहे है।लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लगता है कि कोरोना से जारी जंग में शिवराज अकेले पड़ते नज़र आ रहे है ,वे कब तक  अकेले  इस बड़ी महामारी से लड़ते रहेंगे।यह बात भी सच है कि वर्तमान समय में शासन प्रशासन स्तर पर कोरोना वायरस से लड़ने के  संबंधित कार्य पूरी तत्परता से  हो रहे हैं कोरोना  संक्रमण को रोकने और प्रभावितों को सहायता पहुंचाने में पूरा शासन प्रशासन लगा हुआ हैं l सरकार की पहल और प्रयासों के परिणाम भी अच्छे आ रहे हैं काफी हद तक प्रदेश में कोरोना वायरस कंट्रोल में भी   है l लेकिन यह प्रयास कब तक करने पड़ेंगे इसकी सटीक जानकारी अनिश्चित है l ऐसे हालातों में  महामारी से लड़ने के लिए टीम की आवश्यकता होती है, विषम  परिस्थिति होने के कारण  साथ कुछ अति आवश्यक विभागों में मंत्रि मण्डलीय सहयोगियों का होना अतिआवश्यक नज़र आ रहा है ।अकेले मुख्यमंत्री मात्र प्रशासनिक अधिकारियों के साथ इस बड़े राज्य के लिये कार्य करना दुरूह भी होगा ही इसलिए इन परिश्थितियों में अंतरिम मंत्रि मंडल गठन करना अति आवश्यक लग रहा है, खास कर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, खाद्य व नागरिक आपूर्ति और गृहविभाग  के साथ साथ जनसंपर्क विभाग का,जिससे  विभागीय मंत्रियों के साथ समन्वय रख कर मुख्यमंत्री  स्वयं आपदा प्रबंधन की निगरानी कर सकेंगे।और प्रदेश में महामारी से लड़ने में परिणाम भी अच्छे आ सकेंगे


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