कोरोना वाॅयरस दे रही इंसानो को सीख, इससे बचे तो प्रकृतिक मार झेलने को रहे तैयार- चैतन्य मिश्रा


चैतन्य मिश्रा :-


मई-जून में पड़ने वाली भीषण गर्मी में आज जहां वातावरण में पूरी तरह से ठंडक है, लोग सुकुन के साथ आनंदमय सांस ले रहे है। कोरोना वाॅयरस इंसानो के लिए सबसे खतरनाक है, लेकिन यह वाॅयरस इंसानो को बहुत कुछ सीख भी दे रही है। अगर इंसान समय रहते इन सीखों को नही समझा तो आगे चलकर कोरोना वाॅयरस से बचने के बाद इंसानो को प्रकृति की मार झेलने के लिए भी तैयार रहना पड़ेगा।


आज जब सुबह नींद खुली तो देखा की सुकून और ताजगी भरी ठंडी हवा के साथ लगभग बिलुप्त हो चुकी वह गौरैय्या   सुबह सुबह कलरव कर फुर्र फुर्र कर यहाँ से वहाँ उड़ रही थी, मानो यह कह रही थी की अब वातावरण  में सब कुछ सही हो रहा है। यह देख कर मेरा मन बहुत ही प्रफुल्लित हो रहा था, लेकिन दूसरी तरफ मेरे जहन में कोरोना का अजीब सा डर भी सता रहा था,कि अब लॉक डाउन के बाद आगे क्या होगा? बहरहाल सुबह की ताजगी देने वाली हवा और पंछियों का कलरव यह इशारा कर रहे थे मानो लाक डाउन के समय अब प्रकृत भी रिचार्ज हो रही है,वैश्विक महामारी कोरोना को परास्त करने के लिए देश में संपूर्ण लॉकडाउन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले से न केवल कोरोना के फैलते प्रभाव को रोकने में सफलता मिली है बल्कि देश का पर्यावरण भी काफी स्वच्छ हो गया है।अभी लॉकडाउन का तीसरा फेज चल रहा है जिसकी वजह से  सड़कें सूनी पड़ी हैं. कामकाज ठप पड़ा है.और लोग घरों में लॉकडाउन खुलने का इंतज़ार कर रहे हैं.लेकिन इस सबके बीच एक अच्छी ख़बर ये आई है कि लॉकडाउन की वजह से भारत के  तमाम शहरों में वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण में भारी कमी आई है.दुनिया जिस पर्यावरण की रक्षा और चिन्ता के लिए लगातार  बड़ी-बड़ी बैठकें और कार्य योजनाएं बनती रहीं, वैश्विक चिन्तन होता रहा, बड़े-बड़े धनकोष बनाये गये, पानी के जैसे पैसे बहे लेकिन नतीजे सिफर निकला ।वहीं यह काम एक अदृश्य वायरस कोरोना ने कर दिखाया। यकीनन मानवता पर भारी कोरोना ने बड़ी सीख दे दिया। अब भी समय  है चेतने और जाग उठने का वरना देर हुई और प्रकृति ने कहीं और भी बागी तेवर दिखाये तो क्या गत होगी यह सूक्ष्म से कोरोना ने पहले ही जता दिया है। लॉकडाउन के बाद आसमान के ऊपर पृथ्वी के वायुमंडल में बहुत तेजी से बदलाव हो रहा है। वैज्ञानिक इससे भौंचक्के हैं। मानने को मजबूर हैं कि विश्वव्यापी लॉकडाउनसे ही हुआ है।कार्बन के कम उत्सर्जन से गरम इलाके के लोगों का हवा से जलन भी नहीं हो रही है। यह क्या जिस जिस कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में लॉकडाउन के हालात पैदा कर दिये। एकदम से दुनिया की रफ्तार थम गयी और इनसान को घरों में कैद करके रख दिया, उसीने प्रकृति को उसका खोया हुआ स्वरूप लौटाना शुरू कर दिया वह कर दिखाया जिसको लेकर दशकों, बल्कि कहें अर्ध शताब्दी या उससे भी ज्यादा समय से खूब माथा पच्ची हो रही है लेकिन नतीजा कुछ खास निकला नहीं उसी कोरोना ने महीने भर में ही वह कर दिखाया जिसने जानकार होने एवं हर समस्या का हल ढूंढने की इनसानी गलतफहमीं को चुटकियों में रौंद दिया।वातवरण में मौजूद हवा एक एक सांस पर भारी पड़ रही थी।  कभी नंगी आंखों से कोसों दूर मौजूद पहाड़ दिखना बीती बातें बन गयी, मई  में  में जहां-तहां बहने वाली ठण्डी एवं सुकून देती हवा का झोंका सपना हो गया था।  तभी एक आंखों से न दिखने वाले खतरनाक वायरस ने वह सब कर दिखाया जो इस दौरमें असंभव था और तरक्की दर  इबारत लिखने वाले, जमीनसे आसमान और मंगल तक को मुट्टी में भींचने की योजनाएं बनाने वाले धरती के सबसे सभ्य जीव मनुष्य का जैसे दंभ ही तोड़ दिया और आंखें खोल दी। बात हवा की करें  कल तक जो हवा खुद बीमार थी आज साफ हो गयी। तमाम तरह के प्रदूषण से युक्त हवा सांस के जरिये फेफड़ों में पहुंच कई असाध्य और दूसरे रोगों को बढ़ा रहे थे। इससे उपजी अनगिनत और अनजान बीमारियां शरीर तोड़ रही थी।जमीन आसमान और जल मार्ग में  खपत होने वाले ईंधन जो जहरीली हवा में तब्दील हो जाते हैं, की देन थी। कोरोना संक्रमण के इस दौर में विशेषज्ञ नदियों की अपने स्तर पर की जाने वाली साफ-सफाई को एक भावी मॉडल के  देख रहे हैं, ताकि भविष्य में सभी नदियों को पुनर्जीवित करने का रास्ता बन सके।मई-जून में पड़ने वाली भीषण गर्मी में आज जहां वातावरण में पूरी तरह से ठंडक है, लोग सुकुन के साथ आनंदमय सांस ले रहे है। कोरोना वाॅयरस इंसानो के लिए सबसे खतरनाक है, लेकिन यह वाॅयरस इंसानो को बहुत कुछ सीख भी दे रही है। अगर इंसान समय रहते इन सीखों को नही समझा तो आगे चलकर कोरोना वाॅयरस से बचने के बाद इंसानो को प्रकृति की मार झेलने के लिए भी तैयार रहना पड़ेगा।



Popular posts
क्या ‘‘वरूण’’ भारतीय राजनीति में (विलुप्त होते) ‘‘गांधीज़’’ (नाम) की परंपरा के सफल वाहक सिद्ध हो पायेगें
Image
पेगासस : पत्रकारों, जजों मंत्रियों आदि की जासूसी लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए अत्यंत खतरनाक , जांच ज़रूरी..
Image
तनाव’’, ‘‘कारण-निवारण’’!
Image
रेलवे स्टेशन के बाहर लोकायुक्त की कार्रवाई, कार्यपालन अभियंता को तीन लाख की रिश्वत के साथ पकड़ा
Image
‘लोकतंत्र के मंदिर’’ में ‘‘अर्द्धसत्य’’ कथन कर ‘‘न्याय मंदिर’’ व ‘‘जनता के मंदिर’’ को झूठला दिया गया?
Image