शिवराज जी,बेटी अभी बाप के घर में ही है..........

रघु मालवीय:-


देश के अलग अलग हिस्सों में शराब की दुकानें खुलते ही उमड़ी भारी भीड़,सोशल डिस्टेंसिग की उड़ी धज्जियां...पियक्कड़ो की हरकत से कोरोना के खिलाफ कैसे जीतेगा देश यह लड़ाई...

भोपाल। देश में लाॅकडाउन का तीसरा चरण आज से शुरू हो गया है,इस तीसरे चरण में देश के अलग अलग हिस्सों में कोरोना मरीजों के आधार पर रेड,ओरेंज और ग्रीन जोन में बांटा गया है। ग्रीन और औरेंज जोन में आज शराब की दुकानें खुलते ही शराब के शौक़ीनो की भारी भीड़ उमड़ पड़ी,जिसमें सोशल डिस्टेंसिग की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। शराब खरीदारों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। वहीं कल से मध्यप्रदेश में इन्दौर,भोपाल और उज्जैन जिलों  को छोड़कर शराब की दुकानें खोलने के आदेश आज आबकारी विभाग ने जारी कर दिये है। सवाल यह उठता है कि जब देशभर में सभी धार्मिक स्थल बन्द है,स्कूल कालेज के साथ ही कई आवश्यक वस्तुओं के संस्थान बन्द है तो क्या शराब की दुकानें खोलना जरुरी है? आज देश की राजधानी दिल्ली,चंडीगढ़,जयपुर तथा छत्तीसगढ़ में आज शराब की दुकानों पर शराब खरीदने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी,यहां शराब खरीदने के लिए लोग एक किलोमीटर की लाइन में खड़े रहे,शराब खरीदने के लिए वो लोग भी खड़े नजर आये जो कल तक मांग कर खाना खा रहे थे,फिर इनके पास दारू खरीदने के लिए रूपये कहां से आ गये। इस भीड़ को देखकर नहीं लगता की हम कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई को जीत पाएगें। राज्य सरकारों के लिए शराब के ठेकों से कमाई करने का यह लालच खतरनाक साबित हो सकता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चौहान जी से मै एक ही बात कहना चाहता हूं-अभी बेटी बाप के घर में है...यानी अभी भी मौका है,इस भीड़ को रोकने के लिए हमारे पास। एक बार शराब की दुकानें खुल गई तो फिर भीड़ के साथ कोरोना वायरस के संक्रमण को रोक पाना मुश्किल हो जाएगा। अभी प्रदेश के हालात कुछ हद तक नियंत्रण में है। 


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