सरकार बदलते ही शराब का गोरखधंधा चालू


 


राजनगर/ शराब की दुकानों पर कमान संभालने वाले आबकारी विभाग का बिक्री का गणित गडबड़ है, एमआरपी से ज्यादा रेट पर बिक्री न करने का नियम भी आबकारी विभाग ने अपने ताक के नीचे दबा डाला है।


खबर राजनगर कोयलांचल क्षेत्र के शराब ठेके से निकल कर आ रही है जहाँ सरकार के बदलने के उपरांत नवसृजित शराब के ठेकों की स्थिति एक गोरखधंधामयी माहौल को उत्सर्जित कर रही है।प्रदेश में शराब ठेकेदारों द्वारा दुकानों के लायसेंस सरेंडर करने के बाद आबकारी विभाग ने शराब दुकान खोलकर कारोबार की शुरुआत की है, लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारी ही मनमाने दामों पर देशी-विदेशी शराब बेचकर अपनी जेब भरने में जुट गया है फलतः मनमाने दामों की वजह से शराब के शौकीनों की जेब ढीली हो रही है।  


 


पहले करोड़ो में बेची भट्टी, फिर बन गई गले की हड्डी


 


कोरोना काल में दो माह तक शराब दुकानें बंद रहने के बाद प्रदेश सरकार ने जब दुकानें खोलने की अनुमति ठेकेदारों को प्रदान की तो ठेकेदार कुछ माह पूर्व ही करोड़ों में लिए गए ठेके और दो माह के बीच हुए नुकसान को लेकर प्रदेश सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने के लिए सामने आ गए, परन्तु शराब ठेकेदारों की मांगों को देख प्रदेश सरकार ने उनकी बात को मानने से इंकार कर दिया, करोड़ो रूपये के दांव लगाने वाले शराब के ठेकेदारो को जब सरकार से कोई भी सहानुभूति नही मिली तब प्रदेश भर के कई शराब ठेकेदारों ने अपने लायसेंस सरकार के समक्ष सरेंडर कर दिए। 


 


सरकार ही बेचने लगी शराब, न कीमत तय न ही हिसाब


 


शराब से प्रदेश सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व प्राप्त होता है। जिसके चलते सरकार द्वारा आबकारी विभाग को दुकानें संचालित करने के निर्देश जारी किए गए। इस फैसले से फलीभूत आबकारी विभाग ने देशी और विदेशी शराब दुकानों की शुरुआत कर दी।परन्तु सरकारी शराब दुकान हो जाने का खामियाजा आम जनमानस को महंगे दामो में शराब को खरीदकर चुकाना पड़ रहा, आबकारी विभाग मनमाने दामो पर शराब की कीमतें वसूल रही है और आए दिन शराब के ठेकों पर विवाद की स्थिति प्रगट हो जा रही है।


 


ना मीनू है ना रेट है, सब कुछ अंदर ही सेट है


 


राजनगर अंग्रेजी शराब दुकान की बात किया जाए तो ग्राहकों द्वारा सबसे पहले रेट और ब्रांड की लिस्ट मांगी गई जिसको हर बार संचालकों ने देने से इनकार कर दिया, और मनमाने दामो पर शराब बेच रहे है।उक्त घटनाक्रम से यही साबित होता है कि एक बहुत बड़ा गोरखधंधा सरकारी तमगे की आड़ लेकर संचालित करवाया जा रहा है।


 


लाख बिठा लो तंत्री-संत्री, मैं ही राजा मैं ही मंत्री


 


सरकारी तंत्र के कामगारो ने दुकानों के संचालन के लिए आबकारी के हवलदार और सिपाही को जिम्मा दिया है, लेकिन मानो हमारा राजनगर अनुपम है, अनमोल है, जिसके कारण यहां की शराब दुकान भी दुर्लभ प्रजातियों में आ रही है। दुकानों पर पुराने ठेकेदार का ही स्टाफ शराब की बिक्री कर रहा है, वही कैश संभाल रहा और पूरी कमान रखा है और हवलदार सिपाही सिर्फ देख रहे थे।अर्थात मैं ही राजा मैं ही मंत्री के कहावत को सत्यार्थ करने में लगा हुआ है।


 


 


इनका कहना है कि


आपके द्वारा जानकारी दी गई है मैं तुरंत आबकारी विभाग से बात करता हूँ !  


 


अमन मिश्रा


अनुविभागीय दंडाधिकारी कोतमा


 


 


 मुझे यह बात की जानकारी नहीं थी आपके द्वारा जानकारी मिली है मैं अभी पता करवाता हूँ ! 


          पी बरा


जिला आबकारी अधिकारी