मप्र : अगर सरकार और प्रशासन सख्त होता, तो प्रदेश में भयावह मंजर न आते सामने ? मप्र में अनूपपुर जिला डेंजर जॉन में।

 राजकमल पांडे:-



भोपाल/मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण जिस तरह दिन प्रतिदिन विकराल होता जा रहा है, और जिले-दर जिले के प्रशासनिक अमला ने लापरवाही को छूट देकर रखा हैं। उस हिसाब से आने वाले कुछ ही दिनों में मध्यप्रदेश ज्यादा वक्त के लिए सुरक्षित नही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते 28 अप्रैल को मध्यप्रदेश में 58756 की कोरोना रिपोर्ट में 12758 लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है। मतलब मध्यप्रदेश का पॉजिटिव रेट 21.7 रहा। कल यानि 28 अप्रैल को इंदौर में 10355 सैम्पलों की जांच में 1789 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है, जहां पॉजिटिव रेट 17.27 रहा। साथ ही प्रदेश में 105 लोगों की मृत्यु भी दर्ज हुई है। 

आपको बता दें कि कल यानि 28 अप्रैल 2021 को अनूपपुर में 512 सैम्पलों में 185 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। और कल अनूपपुर का पॉजीटिव रेट 36.12 था। प्रदेश के अन्य क्षेत्र जोकि टेंजर जॉन घोषित हैं इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन आदि में अनूपपुर जिले की आबादी 2011 के जनगणना के अनुसार 7.49 लाख दर्ज है जोकि वर्तमान में अनुमानित आबादी लगभग 10 लाख के आसपास होगी  व जनसंख्या घनत्व 200 प्रतिवर्ग किलोमीटर है। और जिले में बीते 9 दिवस में 5598 लोगों के सैम्पलों में 1887 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि की गई है, और इस 9 दिन की रिपोर्ट में पॉजिटिव रेट 33.77 प्रतिशत रहा है। इससे साफ ज़ाहिर होता है कि अनूपपुर जिला मध्यप्रदेश का सबसे टेंजर जॉन है, जिसे सरकार और प्रशासन हल्के में ले रहा। अनूपपुर में अब तक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 38 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई है, वहीं 1 अतिरिक्त मृत्यु कल रात्रि यानि 28 अप्रैल को दर्ज हुआ है। मतलब अब तक 39 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। वहीं हमारे सूत्र कहते हैं कि अब तक 46 लोग दम तोड़ चुके हैं। अनूपपुर में सख्ती बेहद जरूरी है और इस तरह की 1 सप्ताह तक प्रशासन सख्त रहे। क्योंकि 20 अप्रैल से लेकर 28 अप्रैल तक अगर प्रशासन ने लॉकडाउन की गंभीरता को समझते हुये पालन करवाया होता, तो आज यह हालात न होते। आवागमन में पूर्णतः रोक हो, बेवजह घूमने पर रोक हो।  अन्यथा अनूपपुर जिले को मौत के टीले में बदलने से कोई नही रोक सकता। और प्रदेश सरकार ने जिन्हें 3 जिलों शहडोल, उमरिया व अनूपपुर का कोविड19 प्रभारी बनाके भेजा गया है, उन्हें जिले के इस आंकड़ों व पॉजिटिव रेट पर प्रशासन से विचार विमर्श करना चाहिए। अगर कोविड19 प्रभारी स्वयं में गदगद होकर प्रदेश सरकार से अनूपपुर जिले को मौत टीला बनाकर अवॉर्ड लेना चाहते हैं, तो यह अनूपपुर के लिए शर्म और उनके राजनीतिक भविष्य लिये अच्छा होगा। वहीं प्रशासन अनूपपुर को टेंजर जॉन घोषित करके। टेस्टिंग बढ़ाये और अगर ऐसा करने में असफल होते हैं, तो जिले की हालात अभी और गंभीर होगी, अभी और लोगों की साँसे उखड़ेंगी।

सिस्टम की सांसें फूल चुकी हैं, और अपनी सांसों की रक्षा हेतु ख़ुद संभालिये। सरकारें और सिस्टम ख़ुद लड़खड़ा चुके हैं। राजधानी भोपाल की यह स्थिति है कि अस्पतालों में बेड मिलना मुश्किल हो गया है। मिल गया तो ऑक्सीजन नहीं, आईसीयू और वेन्टीलेटेड बेड सरकारी अस्पतालों में एक भी खाली नहीं है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि सरकार की 104 कोविड कंट्रोल रूम बोल रहा है। 20 हज़ार रुपये दिन प्राइवेट अस्पतालों में देना किसी गरीब के बस की बात नहीं है। वहीं सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक मध्यप्रदेश में दिनांक 28 अप्रैल तक में (Reserved) आइसोलेशन बेड 23038 है, जिसमें 9893 भरे हुये हैं, रिक्त बेड 13143 है। वहीं (Reserved) ऑक्सीजन सपोर्ट बेड 23615 हैं, जिसमें 20338 भरे हुये हैं, रिक्त 3377 बेड हैं। साथ ही (Reserved) ICU/HDU beds (आईसीयू/एचडीयू) बेड 9585 हैं, जिसमें 9040 भरे हुये हैं, रिक्त 544 बेड हैं। हालात यह हैं कि गरीबों के मरने पर लकड़ी और कफ़न नसीब नही हो रहा है, अस्पताल, ऑक्सीजन, बेड, दवा इंजेक्शन दूर की बात है। सरकारें और सिस्टम पूरी तरह से फिस्सडी साबित हो चुकी हैं।

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