डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस के दाम कम कर सरकार आम जनता की हितैषी होने का कर रही प्रदर्शन : श्रीधर शर्मा

अमरकंटक/ अनूपपुर जिले की पवित्र नगरी अमरकंटक में लंबे समय से आम जनता के दर्द को जमीनी स्तर पर महसूस करने वाले मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव श्रीधर शर्मा ने सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए कहा है कि वर्तमान सरकार आम जनता को निरंतर गुमराह कर रही है और आम जनता के हितों को दरकिनार कर राजनीति का दुरुपयोग कर रही है लेकिन चुनाव आते ही जनता को प्रलोभन देने की सरकार की नीति शर्मनाक है। यदि वास्तव में सरकार आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर जनता का विकास करने की मंशा रखती तो शायद केवल चुनाव आने पर ही मंहगाई को कम करने की की नहीं सोचती, बल्कि आम जनता की मूल आवश्यकताओं को सर्वदा नियंत्रित दरों पर रखती, जिससे कि गरीब जनता का भी रहन सहन सुधर सके। 


 _आम जनता के लिए जनता जनार्दन का सम्बोधन प्रारंभ चुनावी दस्तक के संकेत_ 


चुनावी वर्ष के आते ही आम जनता अब पुनः जनता जनार्दन कहलाने लगी है और राजनीतिक मंचों पर राजनेताओं और राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की भाषा आम जनता को "जनता जनार्दन" की उपमा से संबोधित करने लगी है। हालांकि देश की जनता सरकार और राजनेताओं की इस चापलूसी से परिपूर्ण भाषा को समझ चुकी है और आगामी नगरीय निकाय और पंचायती चुनाव में आम जनता का बुलडोजर भी लगभग तैयार है। आम जनता ने भी अपने मतों के सदुपयोग पर विचार करते हुए बुलडोजर तैयार कर रखा है और संभवतः आगामी चुनाव में इसके परिणाम व जनता के बुल्डोजरी रुझान भी जल्द ही सभी के समक्ष होंगे।


_आम जनता के दर्द से राजनीतिक दलों व राजनेताओं का सीधा सरोकार होने का प्रदर्शन शुरू होते ही आम जनता में चुनावी हलचल तेज_


श्री शर्मा ने बताया कि चुनाव आते ही पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की सब्सिडी वाले मैसेज से मीडिया जगत व सोशल मीडिया में जबरदस्त उफान आया और पेट्रोल की कीमत में 9.50 रुपए की गिरावट के बावजूद भी लोगों में कोई खुशी दिखाई नहीं दे रही है बल्कि लोगों को समझ में आ चुका है कि वर्तमान सरकार आम जनता को चुनाव के लड्डू परोसना प्रारंभ कर रही है और इसकी शुरुआत पेट्रोल, डीजल की कीमतों को कम करके की जा रही है, जिससे कि जनता के दिमाग को कुछ हद तक मंहगाई कम करने की दिशा में केंद्रित कर जनता को भ्रमित किया जा सके। अब देखना यह है कि आम जनता केवल "जनता जनार्दन" कहने पर खुश होने वाली है या इन चुनावी हथकंडों को नकार कर अपने मताधिकार का जवाब देने वाली है?