क्या कुलपति / कुलसचिव द्वारा भारत सरकार के फंड का उपयोग नक्सलाइट तथा टेररिस्ट गतिविधि के लिए तथा छग के मंत्रियों को देने के लिए किया जा रहा है?

अनुपपुर। डॉ नीरज राठौर द्वारा तथा उसके अन्य सहयोगियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र रचकर, ई-मेल स्पूफिंग और फ्रॉड करके, मिथ्या, द्वेषपूर्ण एवं तंग करने वाला झूठी ईमेल भारत सरकार को भेजने, प्रतिरूपण द्वारा छल करने, जानबूझकर कूटरचित गलत दस्तावेजों को असली रूप में उपयोग करने, पहचान चुराकर अपराध करने के मामले में जाँच ने नया मोड़ ले लिया है, डॉ नीरज राठौर द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि -“जयस-“jays400438@gmail.com” नाम से बनाया गया ईमेल को उन्होंने (डॉ नीरज राठौर) ही बनाया है। इस स्वीकार से यह स्पष्ट हो गया है कि इस ईमेल को नीरज राठौर द्वारा ही अपने कंप्यूटर / लेपटॉप संसाधन से क्रिएट किया गया है तथा भारत सरकार के अधिकारियों को भेजा गया ई-मेल -“जयस-“jays400438@gmail.com” नीरज राठौर ने ही ईमेल भेजा है। हिंदु देवी देवताओं को अपमानित करने, अनुसूचित जाती के सदस्य को जातिगत गाली देने, भगवान बिरसा मुंडा को अपमान करने के मामले में भी जाँच पूरी हो गयी है तथा शोध छात्र तथा विश्व हिंदु परिषद् के विश्वविद्यालय सहप्रमुख वैद्यनाथ राम, ऋतुराज सोंधिया, चिन्मय पांडे, मोरध्वज पैकरा तथा खेलन सिंह ने आरोपी डॉ नीरज राठौर की तत्काल गिरफतारी की मांग की है। 

इसमें महत्वपूर्ण विषय यह है कि इस ईमेल में डॉ राठौर द्वारा भारत सरकार के फंड को नक्सलाइट तथा टेररिस्ट को करोड़ों रुपए फंड करने का बात लिखा गया है, विश्वविद्यालय में फंड भारत सरकार के कई एजेंसियों से आते हैं जिसमें कई मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, शिक्षा मंत्रालय, HEFA, DST, DBT इत्यादि शामिल है, फंड का उपयोग करने की एक शासकीय प्रक्रिया है तथा उस प्रक्रिया का अंतिम अनुमोदन विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति जी करते हैं, अतः नीरज राठौर द्वारा भारत सरकार के फंड को नक्सलाइट तथा टेररिस्ट को देने संबंधी लिखित ईमेल करने से विश्वविद्यालय के फंड को यूटिलाइज करने की प्रक्रिया में शामिल दर्जनभर से ज्यादा अधिकारी इसके जाँच के घेरे में आ गए हैं क्योंकि किसी भी प्रोजेक्ट या किसी कार्य के लिए भारत सरकार से आए हुए फंड का इस्तेमाल तथा पेमेंट करने की एक निश्चित प्रक्रिया से होता है, जिसमें सेक्शन ऑफिसर श्री वीरेंद्र पांडे, सहायक कुलसचिव डॉ अखिलेश सिंह, इंटरनल ऑडिट ऑफीसर प्रोफेसर आशीष माथुर, वित्त अधिकारी डॉ अंतर्यामी जेना, कुलसचिव पी. सिलुवेनाथन, कुलपति प्रो श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी, सेंट्रल परचेस कमिटी के चेयरमैन प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी, सेंट्रल परचेस कमिटी के सदस्य डॉ मृदुल कुमार सिंह, लोकल पर्चेस कमिटी के प्रो आलोक श्रोत्रिय, प्रो एच एन मूर्ति सहित कमेटी / प्रक्रिया के लिए बनी हुई वेरिफिकेशन कमेटी के दर्जन भर से ज्यादा प्रोफेसर इसमें शामिल होते हैं तब जाकर फंड का ट्रांसफर होता है, ऐसे में डॉ नीरज राठौर द्वारा लिखा गया ईमेल जिसमे नक्सलाइट तथा टेररिस्ट को फंड दिए जाने का उल्लेख है ऐसे में न्यायोचित जाँच के लिए विश्वविद्यालय के सेक्शन ऑफिसर श्री वीरेंद्र पांडे, कुलपति प्रो श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी, सेंट्रल परचेस कमिटी के चेयरमैन प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी तीन दर्जन भर से ज्यादा प्रोफेसर को अजाक थाना कार्यालय बुलाकर इस संदर्भ में कथन लेकर इस विषय की गंभीरता से जांच करने की आवश्यकता हो गयी है।

इसके अलावा डॉ नीरज राठौर द्वारा प्रेषित किये गए फर्जी ईमेल में लिखा गया है कि भारत सरकार के करोड़ों रुपए का फंड का उपयोग छत्तीसगढ़ के कुछ मंत्रियों के माध्यम से राष्ट्र-विरोधी कार्यो के लिए किया गया है, ऐसे में डॉ नीरज राठौर को छत्तीसगढ़ के उन सभी मंत्रियों का नाम बताना होगा, जो राष्ट्र-विरोधी कार्यो में सम्मिलित हैं तथा राष्ट्र-विरोधी कार्यो के लिए उन मंत्रियों द्वारा उपयोग किए जा रहे मोबाइल तथा उनके द्वारा विश्वविद्यालय में हुए कार्यक्रम का विवरण देना होगा तथा उन मंत्रियों के अकाउंट का डिटेल्स भी देना होगा जिसमें करोड़ों रुपए का फंड का उपयोग राष्ट्र-विरोधी कार्यो के लिए किया गया है। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मंत्री तथा मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में रुके थे तथा छत्तीसगढ़ के मंत्री तथा मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के गौरेला-पेंड्रा कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी तथा प्रो. आशीष माथुर सहित दर्जन भर प्रोफ़ेसर तथा अधिकारी विश्वविद्यालय गए थे, डॉ नीरज राठौर द्वारा प्रेषित किये गए फर्जी ईमेल में मंत्रालय के अधिकारियों को ऐसा धमकाया गया है कि वे प्रोटोकॉल के तहत उन्हें इन्फॉर्म कर रहे हैं और भी आगे इस विषय को प्रधानमंत्री कार्यालय तथा आइबी को भी फॉरवर्ड करेंगे। 

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि डॉ नीरज राठौर विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष के पद पर पदस्थ हैं, फर्जी ईमेल लिखने के लिए क्या उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति या कुलसचिव से अनुमति ली थी? या डायरेक्टर एकेडमीक प्रो आलोक से अनुमति ली थी? या DSW प्रो भुमिनाथ से अनुमति ली थी? उक्त चारों अधिकारियों से इस विषय में बयान लेना आवश्यक है कि क्या इस ईमेल को भेजने से पहले डॉ नीरज राठौर ने उनसे कोई चर्चा की थी या अनुमति ली थी क्या? यह जांच का विषय है 

मामले की जाँच के लिए दिनाँक 01 /09 /22 को डीएसपी श्री राहुल शैयाम विश्वविद्यालय आये थे तथा धटना स्थल का मुयायना करके धटना के साक्ष्य का प्रमाणीकरण किया है।



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