अस्मिता पर राजनीति कहां तक जायज ?



पिछले दिनों एक घटना से मप्र की राजनीति का माहोल गरम हो गया है, मध्यप्रदेश में कांग्रेस के दो विधायकों पर एक महिला ने चलती ट्रेन में छेड़खानी और बदसलूकी करने का आरोप लगा है, महिला अपने नवजात बच्चे के साथ रेवांचल एक्सप्रेस से भोपाल जा रही थीं जहां पुलिस ने महिला की शिकायत पर दोनों विधायकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है वहीं सत्ताधारी बीजेपी ने कांग्रेस विधायक पर लगे आरोपों को उनका चरित्र बताते हुए निशाना साधा है और विधायकों को पार्टी से निकलने की मांग की । इसके बाद से आरोपी विधायकों की प्रतिक्रिया सामने आई है। विधायकों ने अपने ऊपर लगे छेड़खानी के आरोपों को निराधार बताते हुए इसे विरोधी पार्टी की साजिश करार दिया। मप्र की सियासत में पिछले कुछ दिनों से यह तस्वीर छाई हुई है इस घटना के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है मामला जनप्रतिनिधियों का है और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी एक साल बाकी है लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। उनके नेताओं के बयानबाजी और उनकी गतिविधियां दोनों ही पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। रुख तो सख्त है लेकिन उनकी राह में आ रही चुनौतियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कौन दोषी है और कौन दोषमुक्त है यहाँ पर सब कुछ जाँच के दायरे में है कई बार आखो देखा भी सच नहीं होता कई बार जो बता कर प्रस्तुत किया जा रहा है वो भी सच नहीं होता है। लेकिन यहाँ पर सवाल यह उठता है की कोई भी महिला जो अपने नवजात बच्चे के साथ सफर कर रही हो भला वो इस तरह का संगीन आरोप किसी पर क्यों लगा देगी ? या उनके पति यह आरोप क्यों लगा देंगे ? यह भी आरोप है की, भारतीय जनता पार्टी की साजिश है तो क्या बीजेपी का राजनैतिक स्तर इतना नीचे गिर गया है की पार्टी इस तरह से अपकीर्ति करने लगी है यह भी बहुत ज्यादा भरोसेमन्द बात नहीं लगती है। यह एक परिस्थित जन्य घटना हो सकता है, वो किस सन्दर्भ में है ,क्यों है? क्या हुआ ? घटना तो हुई है ,पुलिस भी आई । जांच पर तथ्यों की बात होनी चाहिए जब आरोप लगा तब दोनों माननीयो का मेडिकल क्यों नहीं कराया गया ,शराब पिए थे या नहीं ? इसमें कोताही क्यों बरती गई अगर पुलिस उसी समय मेडिकल करा लेती तो बात आगे तक नहीं बढ़ती। क्युकी आरोपित भी सम्मानीय विधायक है उनके इस तरह के आचरण की कोई अपेछा भी नहीं करता , लेकिन वहां कुछ तो बात हुई है जिसके कारण विवाद की परिस्थिति पैदा हुई ,बहरहाल यह जांच का विषय है जो की जांच में सामने आ जायेगा किन्तु इस समस्त घटना से एक बात तो सर्वविदित है कि इस तरह की घटना से पाटिंओ के नाम अवश्य खराब होते हैं कि एक पार्टी दूसरी पार्टी पर आरोप प्रत्यारोप कर अपने ऊपर लगे हुये आरोपो को नकार कर असली घटना को दबाने का प्रयास करती है के साथ खुद को दूध का धुला साबित करना का प्रयास करती है। बहरहाल जो भी हो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिये जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो। लेकिन यहाँ सवाल यह उठता है की क्या आजकल पार्टियों के पास मुद्दे खत्म हो चुके है ऐसी संवेदनशील घटनाओं में राजनीति करना जायज है? कुछ घटनाये यह बताती है की उनसे कुछ सबक और सावधानी लेने की जरुरत है। लेकिन यहाँ नैतिकता की बात नहीं हो रही है बीजेपी कांग्रेस में आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, लेकिन यहां राजनीति से ऊपर उठकर बात करने की जरुरत है,सबको अपनी जबाबदेहि और लोकाचार्य पर बात करनी चाहिए साथ ही न्याय की प्राकृतिक सिद्धांत का पालन होना चाहिए जिससे जनता में भी सही संदेश पहुंचे!


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