अब अंत बसंत का है?


शेष नारायण राठौर✍️ 

बदलते मौसम के साथ अनूपपुर की राजनीतिक ताशीर व तस्वीर भी बदल रही है अभी कुछ दिन पहले जहां कांग्रेस ने भी अपने जिलाध्यक्ष पद पर, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी  रमेश सिंह को नियुक्त किया है, वही अब भाजपा ने भी अपने जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम को हटाकर पूर्व जिला अध्यक्ष रामदास पुरी को एक बार पुनः अपना जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। सरकार ने एक और नियुक्ति किया है पूर्व विधायक  रामलाल रौतेल  को कोल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त कर राज्यमंत्री का दर्जा दिया है। भाजपा व भाजपा सरकार द्वारा किए गए।

इन नियुक्तियों के अलावा अभी हाल में हुए नगर पंचायत जैतहरी के अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता  अनिल कुमार गुप्ता  के पुत्र निर्वाचित हुए, कई सालों से राजनीति का निर्वासित जीवन जीने वाले अनिल कुमार गुप्ता का यह राजनीतिक पुनर्जन्म है, यह अलग बात है कि  गुप्ता अपने विभिन्न कार्यशैली के कारण समय-समय पर चर्चित रहे हैं।

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र अनूपपुर में दोनों दलों के द्वारा अपना-अपना जिला अध्यक्ष इसी वर्ग से बनाया है। यह अन्य वर्गों के लिए राजनीतिक ईर्ष्या का विषय हो सकता है किंतु राजनीति के क्षेत्र में वनवासियों का बढ़ता दबदबा उनके सामर्थ्य और योग्यता परिणाम है ये नियुक्तियां।

 अनूपपुर विधायक व मध्य प्रदेश सरकार के कबीना मंत्री  बिसाहूलाल सिंह  के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के बाद, भाजपा के पदों पर व सरकार द्वारा नियुक्त पदों पर अपने प्यादों को आगे रखने का कार्य, पूर्वजिलाअध्यक्ष के साथ सांठगांठ कर किया, इससे भा जा पा के नैसर्गिक व जमीनी कार्यकर्ताओं में स्वाभाविक असंतोष ने जन्म लिया। इस जमीनी हकीकत को भाप कर सत्ता और संगठन ने पूर्व विधायक रामलाल  को कोल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष और पूर्व जिला अध्यक्ष रामदास पूरी को एक बार पुनः अपना जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। इन दोनों नियुक्तियों को सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह एवं अनूपपुर की प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंहजी राजनीतिक दूरदर्शिता का परिणाम माना जा रहा है।

 भारतीय जनता पार्टी के नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी तालमेल ना होने का, प्रशासनिक अमले ने भरपूर फायदा उठाया है। यही कारण है कि डबल इंजन की सरकार में भी अपेक्षित विकास के पद चिन्ह माननीय खाद मंत्री के मंचीय भाषण में शिकायतों के रूप में कदमताल करता नजर आया।

 कांग्रेस की तरह सत्ताच्यूत की वेदना से बचने के लिए भाजपा नेतृत्व ने अपने कर्मठ वनवासी द्वय की हाथ में कमान सौंपा है।

 भाजपा इस बात से भली-भांति परिचित है कि उसके जमीनी कार्यकर्ताओं का चुनाव के समय में चुप बैठ जाना, कांग्रेस के लिए शुभता का कारक ना बन जाए? यह प्रथम पक्ष है।


 द्वितीय पक्ष यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में संभावित बगावत को टालने के लिए भाजपा ने यह नियुक्ति किया है। क्योंकि भाजपा के जिला अध्यक्ष रामदास पुरी एवं  रामलाल रौतेल विधानसभा क्षेत्र अनूपपुर के विधायक पद के प्रबल दावेदार हैं।

 तब क्या एक बार पुनः भाजपा विधानसभा क्षेत्र अनूपपुर से श्री बिसाहूलाल  को अपना प्रत्याशी घोषित करेगी?

क्या ये नियुक्तियां बिसाहूलाल हित लाभ के लिए है?

यदि ऐसा होता है तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा क्योंकि भाजपा उम्र दराज अपने नेताओं को,चाहे कोई कितना भी असरदार क्यों ना हो प्रत्याशी नहीं बनाती, चाहे वह भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी हों या पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमुरली मनोहर जोशी हों या फिर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौरजी जैसे अन्य वरिष्ठतम नेता हों।

 खैर!अपनी कथनी-करनी के विषय में राजनीतिक दल चिंतन करें, जनता स्वयं चिंतन कर लेगी कि किसे आवास देना है और किसे वनवास!

 " आली अब अंत बसंत का है,

 विरहिन के घर नाथ नही।

 होले होले बरसात भई,

 बरसात भई वर साथ नही ।"

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