‘‘एमपी अजब- गजब’’! ‘‘अजब’’ प्रदेश के ‘‘गजब’’ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


 5 मार्च को प्रदेश के जन-जन के दिलों में (शिव-राज) राज करने वाले ‘‘शिव’’ के सेवक ‘‘मत चूके चौहान’’ का पालन करने वाले शिवराज सिंह चौहान का आज जन्म दिवस है। निश्चित रूप से जन्मदिन के अवसर पर व्यक्ति की उपलब्धियों को गिनना एक शिष्टाचार होता है। ‘‘कभी घी घना, कभी मुट्ठी भर चना’’ को समान भाव से ग्रहण करने वाले शिवराज सिंह के नाम अनेकानेक उपलब्धियां है। या यह कहें कि उपलब्धियों का भंडार है, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। ‘‘हाथ कंगन को आरसी क्या’’, इनमें से कुछ उपलब्धियां तो देश में सबसे पहले सबसे, आगे व सबसे तेज प्रारंभ करने का श्रेय शिवराज को जाता है। तो कुछ योजनाएं भूतो न भविष्यति की श्रेणी में आती है। ‘‘अपनी करनी पार उतरनी’’ पर विश्वास रखने वाले शिवराज सिंह की कुछ उपलब्धियां ऐसी भी है, जो उन्हें सिर्फ-सिर्फ (एक्सक्लूसिव) उनके द्वारा ही प्रारंभ की गई है। 

 शिवराज सिंह की देश में बिलकुल, अनन्य, नई उपलब्धियां आगे रेखांकित की जा रही है। देश के वे शायद एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के तुरंत-फुरंत नहीं बल्कि एक महीने बाद मात्र पांच सहयोगी मंत्री बनाएं व जिन्हे विभागों का प्रभार देने के पहले भौगोलिक स्थिति के अनुसार संभागीय प्रभार दिये गये। देश की प्रथम गौ कैबिनेट बनी (वर्ष 2020)। समरस गांव सम्मान योजना (अपराध कम करने के लिये तीन साल में एक भी रिपोर्ट थाने में न पहुंचने पर), समस्त गांवों का जन्म दिवस योजना साल में एक दिन तय कर गांव का जन्मदिन मनाकर विकास की योजना बनाना देश में एक बिल्कुल नया प्रयोग है। ‘‘तेल देख, तेल की धार देख’’ का अनुसरण करते हुए लाड़ली बहना योजना के तहत मध्य प्रदेश सरकार बहनों को 1000 महीना देने जा रही हैं, यह योजना 8 मार्च से शुरू हो रही है।

 यद्यपि शिवराज की नीति है कि ‘‘माल कैसा भी हो, हांक हमेशा ऊंची लगनी चाहिये’’, लेकिन देश की विभिन्न योजनाएं में मध्यप्रदेश को अव्वल (प्रथम) स्थान रखने वाली कुछ उपलब्धियां भी है, जो यह दिखाती हैं कि शिवराज ‘‘हथेली पर सरसों जमाने वाले’’ मुख्यमंत्री नहीं है। केंद्र की प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (शहरी पथ विक्रेताओं के लिए) स्कॉच ग्रुप ने गुजरात के साथ-साथ मध्य प्रदेश को सुशासन के लिये सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से नवाजा है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई के साधन में कई गुना वृद्धि होने के परिणाम स्वरूप ही प्रदेश को पिछले पाँच वर्षो से लगातार ‘‘कृषि कर्मण’’ पुरस्कार मिला है। अब वे ‘‘पांव-पांव’’ के साथ ‘‘गांव-गांव’’ वाले भैया भी कहलाने लगे हैं। स्वच्छता के मामले में इंदौर पिछले लगातार पांच सालों से देश में सर्वप्रथम रहकर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। इस प्रकार स्वच्छता के लिए ‘इंदौर मॉडल’ को देश के अनेक प्रदेश अपनाने का प्रयास कर रहे है। इंदौर देश का प्रथम ‘‘वाटर प्लस’’ सिटी (2021 में) बना। स्वच्छ सर्वेक्षण में भी प्रथम। कोविड-19 संक्रमण काल में ओमिक्रॉन के बढ़ते फैलाव को देखते हुए देश में सर्वप्रथम मध्यप्रदेश में नाइट कफर््यू लगाया गया। ऑक्सीजन की कमी होने के कारण ऑक्सीजन के उपयोग के लिए ऑक्सीजन ऑडिट की बिल्कुल नई धारणा देकर स्थिति पर नियंत्रण किया। केंद्र की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा 2022, स्वनिधी योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना व सुकन्या समृद्धि योजना में मध्यप्रदेश प्रथम हैं। उपभोक्ता निराकरण मामले में, निःशक्त विद्यार्थी को शिक्षा देने में अव्वल (वर्ष 2015)। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2021 को एक दिन में सबसे ज्यादा कोविड वैक्सीन 16.91 लाख (1691967) लगाने का वल्र्ड रिकॉर्ड व देश के देश में सबसे ज्यादा 3 करोड़ से ऊपर वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड भी मध्यप्रदेश ने ही बनाया। युवाओं (15 से 18 वर्ष) को वैक्सीन लगाने के मामले में देश में प्रथम दिवस पर मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर रहा (लगभग 7.5 लाख)। अभी 18 फरवरी 2023 (विक्रम संवत 2079) को महाकाल की नगरी अवंतिका उज्जयिनी में ‘‘शिव ज्योति अर्पण’’ कार्यक्रम में जन सहयोग 1882229 दिए (दीपक) से शिवराज सिंह ने प्रज्वलित करवाएं। 

 ‘‘मेरी सुरक्षा मेरा मास्क’’ जन-जागरूकता अभियान चलाया। आंवला उत्पादन में प्रथम (देश का 33 प्रतिशत)। 19 फरवरी 2021 को नर्मदा जयंती के अवसर पर अमरकंटक में पौधा लगाकर 1 वर्ष तक प्रतिदिन एक पौधा लगाने का न केवल संकल्प शिवराज सिंह ने लिया, बल्कि उसको प्रतिदिन लागू कर एक नहीं 2 वर्ष से भी ज्यादा समय व्यतीत होकर प्रतिदिन एक या अधिक पौधे लगाए हैं। वृक्षाय नमामि। जनता से भी ऐसी ही अपील की जाकर ‘‘अंकुर कार्यक्रम’’ प्रारंभ कर अभी तक 17 लाख से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं। अस्पताल की तर्ज पर किसानों के लिए ‘‘कृषि ओपीडी’’ के रूप में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत सर्वप्रथम 2020 में हरदा में प्रारंभ की गई। राज्य में न केवल मांग-आपूर्ति के अनुरूप बिजली का उत्पादन हो रहा है, बल्कि अब वह दूसरे प्रदेश को अतिरिक्त बिजली बेच भी रहा है। इस प्रकार लगभग 39 विभागों की 200 से अधिक अनेकानेक योजनाएं उन्होंने जनहित में लागू की हैं। मध्य प्रदेश को विकास के माध्यम से देश का नम्बर वन राज्य बनाने का उनका संकल्प व रोड़ मेप है। इसी दिशा में 2023-24 के लिए प्रस्तुत किये गए बजट में ‘‘मां’’ ‘‘बेटी’’ व ‘‘बहन’’ को शामिल करते हुए महिलाएं जो लगभग आधी जनसंख्या के लिए 33 प्रतिशत से अधिक बजट प्रावधान अनुसूचित जनजाति व अनूसचित जाति के कुल 37 प्रतिशत आबादी के लिए भी कल बजट का 37 प्रतिशत से अधिक धन राशि का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश की विकास यात्रा के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कथन महत्वपूर्ण है कि मध्यप्रदेश गजब तो है ही, देश का गौरव भी है। कालांतर में ‘‘मध्यप्रदेश’’ भारत की विकास गाथा के पीछे मुख्य प्रेरक शक्ति बन जाएगा’’। ‘‘स्वारथ लागि करहिं सब प्रिती’’। 

             उपलब्धियों की प्राप्तियों के साथ, ‘‘उपलब्धियां’’ समाप्त न होने वाला अंतहीन सिलसिला है, जो कभी भी पूर्ण नहीं हो सकता है। तथापि इस पूर्णता को प्राप्त करने की दिशा में शेष रही रिक्तताएं कहीं न कहीं सफल व्यक्ति की कमियों को भी विवेचना करने का अवसर प्रदान करती है। एक व्यक्तित्व का सही मूल्यांकन तभी होगा, जब समस्त उपलब्धियों के साथ कमियों का भी समालोचनात्मक विश्लेषण किया जाये। वह इसलिए कि, जन्मदिवस के अवसर पर उस व्यक्ति को यह विचार करने का अवसर मिलेगा कि जो काम अधूरे रह गये है, जिसकी विवेचना समालोचना के रूप में की गई है, उसको पूरा करने के लिए शेष अवधि में कदम उठाने की आवश्यकता है। यही सच्ची बधाई जन्मदिवस के अवसर पर शिवराज सिंह चैहान के प्रति है, ताकि वे और आगे पूर्णता की ओर बढ़ सके।

 ‘‘दूरस्थारू पर्वता: रम्यारू’’ को चरितार्थ करती हुई शिवराज सिंह की कुछ प्रमुख असफलताएं भी है। महिलाओं पर होने वाले अपराध, बलात्कार व बच्चों के अपराध के मामलों में मध्यप्रदेश आज भी अव्वल प्रदेश से निकल नहीं पाया है। आत्महत्या के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है। ‘‘हर महान् योद्धा कोई न कोई युद्ध हारता भी है’’। शिवराज सिंह भी अपने लंबे राजनीतिक करियर में मात्र एक चुनाव हारे हैं।

          जन्म दिवस के अवसर पर कुछ भविष्य की बातें भी कर ली जाए, क्योंकि यह चुनावी वर्ष है, तो असंगत न होगा। इसके लिए शिवराज सिंह की तुलना गांधी से करने पर अतिशयोक्ति नहीं होगी। वह कैसे! इसे आगे देखिये! ‘‘घी खाया वालिद ने, सूंघो मेरा हाथ’’ की परंपरा वाली कांग्रेस की मजबूरी गांधी हो गई है, जो उसे न आगे बढ़ने दे रही है और न ही टूटने दे रही है। मतलब कांग्रेस में गांधी शब्द ही ‘फेवीकॉल’ के समान कांग्रेसियों को जोड़ने में सफल रहा है। अन्यथा जिस दिन गांधी हट जायेगे, तब जितने क्षत्रप नेता है, वे सब सुश्री ममता बनर्जी, शरद पवार आदि के समान क्षेत्रीय पार्टी बना लेंगे। चाहे फिर वे कमलनाथ, अशोक गहलोत या भूपेश बघेल हो या अन्य प्रदेशों की बात हो। इसलिए गांधी कांग्रेस की मजबूरी है। सोनिया गांधी उम्र के पड़ाव में होने के कारण नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं है। परन्तु राहुल गांधी में जिस तरह की राजनीति दृष्टि, दिशा, नीति कांग्रेस को सत्ता में पहुंचने के लिए होनी चाहिए, वह मोदी की तुलना में बहुत कमजोर है। इसका लाभ भाजपा को नरेन्द्र मोदी के सत्ता के रास्ते को निष्कंटक व सपाट बनाने में मिल रहा है। लम्बा समय बीत जाने के बावजूद राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता में परिपक्कता न आना मोदी व भाजपा के लिए फायदे की बात है। ‘गांधी’ की उक्त विवेचना करने का उद्देश्य मात्र यही है कि शिवराज की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही हो गई है। 

 भाजपा हाईकमान के सामने भी ‘‘हाकिम की अगाड़ी से बचने वाले’’ शिवराज सिंह की स्थिति ‘‘न उगलते बने न निगलते’’ जैसी हो गई है। 9 महीने बाद प्रदेश में आम चुनाव होने वाले है। एक तरफ भाजपा हाईकमान की नजर में प्रदेश के कोने कोने में शिवराज सिंह से ज्यादा पहचान वाला, (‘‘मामाजी’’) दूसरा अन्य कोई व्यक्ति नहीं है, जो आगामी चुनाव में भाजपा की सत्ता की नाव को सफलतापूर्वक खेव सके। अंदरखाने की बात करें तो भाजपा हाईकमान के पास यह भी रिपोर्ट विभिन्न विश्वस्त सूत्रों से आ रही है कि लगातार 16 वर्ष (बीच में 15 महीने छोड़कर) सत्ता में रहने के कारण शिवराज सिंह के नाम की व्यक्तिगत विरोधी लहर (एन्टी इनकम्बेंसी) (जो स्वाभाविक है) बन गई है, जो चुनाव में हार का कारक सिद्ध हो सकती है। भला ‘‘ख़लक का हलक किसने बंद किया है’’। 

 यह सामान्य प्रक्रिया है, जब हम किसी चेहरे को लगातार देखते है, तो उससे ऊब से जाते है और बिना किसी दोष के उस चेहरे को बदलने के लिए लालायित हो जाते है। एक फिल्म जो कितनी ही अच्छी क्यों न हो, दो-तीन, चार बार ही देखी जा सकती है। पांचवी बार उसे देखने का मन नहीं होगा। वही स्थिति शिवराज सिंह की है। परन्तु इस स्थिति के लिए उन्हें जिम्मेदार कदापि नहीं ठहराया जा सकता है। क्योंकि यह स्थिति उनके कार्यों के कारण नहीं है, बल्कि जनता के द्वारा लगातार एक चेहरा दिखने के कारण है। अब वे उम्र के इस पड़ाव पर चेहरे पर प्लास्टिक सर्जरी करने से तो रहे? यद्यपि राजनीतिक सर्जरी करने में वे माहिर होकर ‘उस्तादों के उस्ताद’ है। यह एन्टी इनकम्बेंसी कारक उस जनता के कारण उत्पन्न हुआ है, जिसने स्वयं शिवराज सिंह को लगातार चुना है और वही जनता अपने कृत्य से उत्पन्न एन्टी इनकम्बेंसी के नाम पर चेहरा बदलने का मैसेज दे, इसके लिए शिवराज सिंह कहां तक जिम्मेदार है? तथापि इस उत्पन्न दोष के लिए उन्हें क्यों ‘‘बली का बकरा’’ बनाया जाना चाहिए? या तो जनता को लगातार चेहरे देखने से ऊबने की प्रवृत्ति को दूर करना होगा, बदलना होगा। अन्यथा पांचवी बार जब आप फिल्म देखने जाएंगे तो हाल में सिर्फ वे ही लोग होंगे जिनको फ्री व स्पेशल पास मिले होंगे। मतलब साफ है! परिणाम भविष्य के गर्भ में है। ‘‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा’’।


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