रिश्वत मामले में इंजिनियर को दो साल की सजा और 10 हजार का जुर्माना


सागर।पंच परमेश्वर योजना के तहत सड़क के मुरमीकरण कार्य के मूल्यांकन कराने के एवज में रिश्वत मांगने वाले सब इंजीनियर को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के न्यायाधीश रामविलास गुप्ता ने दोषी करार देते हुए दो साल की सजा और 10 हजार का जुर्माने की सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार 24 अगस्त 2013 को आवेदक बलराम सिंह ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर के समक्ष उपस्थित होकर शिकायत की थी कि मैं ग्राम पंचायत पातीखेडा का सरपंच हूं। मैंने पंच परमेश्वर योजना के तहत ग्राम कन्नााखेडी से लोंगर तक की रोड का मुरमीकरण कार्य 4 लाख में कराया था। कार्य पूर्ण हो चुका है, लेकिन उपयंत्री नीलेश वासनिक ने उक्त कार्य का अधूरा मूल्यांकन किया है। शेष मूल्यांकन करने के एवज मे उपयंत्री नीलेश वासनिक 80,000 रुपए रिश्वत की मांग कर रहे हैं। मैं उन्हें रिश्वत नहीं देना चाहता, बल्कि रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़वाना चाहता हूं।
आवेदक की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर द्वारा शिकायत का सत्यापन कराया गया। उपयंत्री नीलेश वासनिक द्वारा रिश्वत मांगना प्रमाणित होने पर अपराध पंजीवद्ध किया गया व ट्रेप की कार्यवाही की गई। इस बीच आवेदक का संपर्क आरोपित से न होने से रिश्वत का लेनदेन नहीं हो सका, जिस कारण अग्रिम कार्यवाही नहीं हो सकी। आरोपित द्वारा रिश्वत की मांग की जाना व रिश्वत लेने के लिए सहमत होने का मामला प्रमाणित होने पर उसके विरुद्ध बाद विवेचना अभियोग पत्र विशेष न्यायालय सागर के समक्ष प्रस्तुत किया। विचारण में आरोपित नीलेश को प्रार्थी से रिश्वत की मांग करने व प्राप्त करने के लिए सहमत होने का दोषी पाते हुए विशेष न्यायालय सागर ने उसे दो साल की कैद व 10 हजार के जुर्माने से दंडित किया


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