22 जनवरी को जनजातीय विश्वविद्यालय में भी अवकाश घोषित करने मुख्यमंत्री मोहन यादव, जिलाधीश और विश्वविद्यालय प्रशासन को सौपा गया ज्ञापन


अनूपपुर। अयोध्याधाम में बहुप्रतीक्षित श्रीरामलला के नवीन विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह राष्ट्रीय पर्व में राम से रामत्व को धारण करने जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में भी अवकाश घोषित करने आज मुख्यमंत्री मोहन यादव, विश्वविद्यालय के कुलसचिव, डीएसडब्लू, जिलाधीश को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विश्वविद्यालय इकाई के पूर्व अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व खंड अध्यक्ष, स्वावलंबी भारत अभियान के शहडोल जिला के युवा आयाम प्रमुख एवं विश्वविद्यालय के शोध छात्र चिन्मय पांडे, शुभांकित सोनी विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल संयोजक, आयुष पाण्डेय, विश्व हिंदू परिषद विश्वविद्यालय खण्ड मंत्री ने सभी छात्रों की ओर से संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपा है। 

*छात्र-छात्राएं राम से रामत्व को धारण करने का संकल्प लेंगे

चिन्मय पांडे, शुभांकित सोनी तथा आयुष पाण्डेय ने संयुक्त रूप से बताया की 22 जनवरी को रामस्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर छात्र-छात्राएं राम से रामत्व को मनमानस में संयोजन करने, रामचरित्र का मंचन कर प्रभातफेरी, कलश यात्रा, स्वच्छता अभियान, दीपदान, भजन-कीर्तन, रामायण पाठ सहित अनेक गतिविधि कर राम के चरित्र को धारण करेंगे। इसमें भगवान राम, सीता मैया, लक्ष्मण, हनुमान, भरत, शत्रुध्न, अंगद, विभीषण, नल-नील, कागभुसुंड, नारद, अहिल्या, सबरी, निषादराज, वशिष्ठ ऋषि, विश्वामित्र ऋषि इत्यादि की चरित्र का मंचन रामलीला के रूप में किया जाना प्रस्तावित है। इसमें सभी धर्म, संप्रदाय के छात्र मिलजुल कर राष्ट्रीय त्यौहार के रूप में इस उत्सव को मनाए जाने का निर्णय लिया गया है। प्रभात फेरी, भजन कीर्तन, रामचरित पाठ करते हुए युवा छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय स्थित हनुमान मंदिर तक जाएंगे तथा भजन कीर्तन करेंगे।

*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला की मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कर रहे होंगे तब प्रत्येक छात्र एक साथ उसका दर्शन करेगें

चिन्मय पांडे ने आगे बताया की प्रभु श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर के अवसर पर जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला की मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कर रहे होंगे तो विश्वविद्यालय का प्रत्येक छात्र एक साथ उसका दर्शन करेगें और टीवी स्क्रीन पर ऐतिहासिक अनुष्ठान को देखेंगें और पूजा करेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के तहत ‘‘श्री रामलला दर्शन योजना’’ के तहत छात्र-छात्राएं अयोध्या भी जायेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन इंडियन रेलवे एण्ड टूरिज्म कार्पोरेशन से अनुबंध कर एक ट्रेन बुक करेगी जो एक दिन के लिए विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए चलेगी। जिसमें 2000 छात्र अयोध्या में प्रभु श्री राम के दर्शन करने जा सकेंगे। ट्रेन में छात्राओं और दिव्यांगों का विशेष ध्यान रखा जाएगा, उनके साथ माता-पिता को जाने की अनुमति होगी। 22 जनवरी के ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए इस दिन को दिवाली की तरह मनायें जाने के लिए छात्र संकल्पित है।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, राजस्थान, यूपी, उतराखण्ड की सरकार अवकाश देने की घोषणा कर चुकी है

शुभांकित सोनी ने आगे बताया की अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, राजस्थान, यूपी, उतराखण्ड की सरकार 22 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। वहीं मॉरीशस की सरकार ने 22 जनवरी को हिंदू अधिकारियों के लिए दो घंटे का विशेष अवकाश देने की घोषणा की है, ताकि वे इसमें भाग ले सकें। भारतीय उपमहाद्वीप के निवासियों हेतु ही नहीं अपितु इंडोनेशिया, मलेशिया, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो, बाली द्वीप, श्रीलंका(सिंहल द्वीप), थाइलैंड(स्याम), सिंगापुर सहित विश्व के अनेक देशों के निवासियों को राम का आदर्श चरित्र शिक्षा प्रदान करता रहा है। 

श्रीराम चरित्र को पाठ्यक्रम में शामिल कर दो क्रेडिट देने का प्रावधान बनें

चिन्मय पांडे ने आगे बताया की रामलला प्राण-प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को भगवान श्रीराम के चरित्र "सामाजिक समरसता", "पर्यावरण संरक्षण", "कुटुंब प्रबोधन", "स्वदेशी जीवन शैली" तथा "नागरिक कर्तव्य एवं शिष्टाचार" को धारण करते हुए पाठ्यक्रमों में शामिल करने के लिए भी निवेदन प्रस्तुत किया गया है, ताकि यह दिन यादगार होने के साथ-साथ इस दिन से सभी 140 करोड़ भारतीय अपने हृदय में भी भगवान श्रीराम के चरित्र को धारण कर लें और रामराज की ओर हम सभी आगे बढ़े। राम का आदर्श चरित्र का मंचन, मनन, चित्रण के लिए राष्ट्रीय शिक्षा निति 2020 के अनुरूप प्रायोगिक विषय के रूप में सम्मिलित करके इसके लिए दो क्रेडिट देने का प्रावधान बनाया जाना चाहिए। राम का आदर्श चरित्र युगों से भारतीय उपमहाद्वीप सहित विश्व के अनेक देशों के निवासियों को शिक्षा प्रदान करता रहा है। इसलिए राम के पुनरागमन कार्यक्रम में स्वयं को संयोजित करते हुए छात्र गौरव की अनुभूति करेंगे। 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का एक प्रमुख लक्ष्य विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण भी है*

आयुष पांडे ने आगे बताया की विद्यार्थियों के जीवन के सभी पक्षों और क्षमताओं का संतुलित विकास के लिए रामत्व को पढ़ाया जाना आज की आवश्यकता है। भारतीय परंपरा में चरित्र निर्माण और समग्र व्यक्तित्व विकास शिक्षा का महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जाता है। इस नीति का उद्देश्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो विचारों से, कार्य व्यवहार से एवं बौद्धिकता से भारतीय बनें। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर सभी विषयों में भारतीय ज्ञान परंपरा, कला, संस्कृति एवं मूल्यों का समावेश करने की बात कही गई है जो राम के चरित्र को मन मानस में धारण करने से होगा।